Sonwalkar

शीशे और पत्थर का गणित

अनकहा दर्द

अभिव्यक्ति के माध्यम अनेक हैशब्दों  की शक्ति भी अनन्त हैपर कथ्य जो कीमती है –वह तो अनकहा रह गया। सागर में नावें अनेक हैगोताखोरों का साहस भी असीम हैपर मोती …

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आत्मीय स्पर्श

बड़ों के पाँव छूने का रिवाज़इसलिए अच्छा हैकि उनके पैरों का छाले देखकरऔर बिवाईयाँ छुकरतुम जान सकोंकि जिंदगी उनकी भीकठिन थीऔरकैसे कैसे संघर्षों में चलते रहें हैं वें। बदलें मेंवे …

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असली चेहरे के बगैर

माना किएक दिन बुझाना ही थातुम्हारा किताबी आक्रोशमगर ये सबपलक झपकते हीहो जायेगाऐसी उम्मीद न थी।कम-स-कमतेरह दिन का शोकतो मना लेतेआक्रोश की खुदखुशी पर।कुछ दिन तो रहतेबिना मुखौटों के!पर तुमने …

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अर्थहीनता

हैरत है कि आखिरक्यों जी रहे हैं लोग?जानते हुए भीनाइन्साफी का ज़हरक्यों पी रहे हैं लोग? आखिर जिन्दा रहने मेंइनका मकसद क्या है?निरर्थक जिन्दा रहने कीइनकी आखिरी हद क्या है?ऐसे …

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मेरा यार : कलाकार!

भिंड से बस्तर तकदंगों दुर्घटनाओंअत्याचारों की लपटों में-और मेरा यार, कलाकारशहनाई पर‘जय-जय-वान्ति’बजा रहा है! सुबह से शाम तकघासलेट के क्यू में खड़े हैं लोगदो जून की रोटी का भीजुटा नहीं …

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